अब अविवाहित महिलाओं को भी अबॉर्शन का अधिकार। पत्नी से जबरदस्ती सेक्स बलात्कार की श्रेणी में शामिल।

सुप्रीम कोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला देते हुए अविवाहित महिलाओं को भी गर्भपात का अधिकार दे दिया। अब तक यह सिर्फ विवाहित महिलाओं के लिए लागू था। सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी रूल्स (MTP) के नियम 3b का विस्तार  करते हुए अविवाहित और विवाहित दोनों तरह की महिलाओं को 24 हफ्ते तक अबॉर्शन का अधिकार दे दिया। यानी अब लिव-इन रिलेशनशिप और सहमति से बने संबंधों से गर्भवती हुई महिलाएं भी अबॉर्शन करा सकेगी।

सुप्रीम कोर्ट में आया था यह मामला।

सुप्रीम कोर्ट में ये मामला 25 साल की महिला की याचिका के जरिये आया। इस महिला ने 23 सप्ताह के गर्भ को गिराने की इजाजत मांगी थी। महिला का कहना था कि वो आपसी सहमति से गर्भवती हुई है लेकिन वह बच्चे को जन्म नहीं देनी चाहती क्योंकि उसके पार्टनर ने शादी से इंकार कर दिया है। आज सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए अविवाहित महिलाओं को भी इसकी इजाजत दे दी। यानी अब कोई भी लड़की किसी रिश्ते से गर्भवती होने के बाद लीगल तौर पर एबॉर्शन करा सकेगी।

पत्नी से जबरदस्ती सेक्स बलात्कार की श्रेणी में शामिल।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर विवाहित महिला का गर्भ उसकी मर्जी के खिलाफ है तो इसे बलात्कार की तरह देखते हुए उसे गर्भपात की अनुमति दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा है कि पति की जोर-जबरदस्ती से महिला गर्भवती हुई है तो उसे यह अधिकार होना चाहिए कि वह 24 हफ्ते तक गर्भपात करवा सके। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने लंबे समय से कानूनी बहस का मुद्दा बने वैवाहिक बलात्कार या मैरिटल रेप को गर्भपात के मामलों में मान्यता दे दी है। हालांकि इसे दंडनीय अपराध माना जाए या नहीं इसपर फिलहाल बहस चल रही है। फरवरी 2023 में इस मामले पर सुनवाई होगी।