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कहानी RS Bhatti IPS की: भीड़ आग लगा रही थी, लालू पहुंचे और बोले- क्रिमिनल का भट्ठा बैठाने पंजाब से आरएस भट्टी को लाए हैं

कहानी बिहार के उस दौर की जब लालू यादव और राबड़ी देवी की सरकार चलती थी। मुख्यमंत्री राबड़ी देवी थीं और सरकार पर्दे के पीछे से लालू यादव चलाते थे। कोई दिन नहीं बीतता था जब अपहरण, हत्या, लूट, डकैती या गैंगवार जैसी कोई बड़ी वारदात अखबार की सुर्खियां ना बनी हो। आरजेडी के खिलाफ बीजेपी के स्थायी आरोपों से एक शब्द उधार लें तो उस जंगलराज में 13 जून, 1998 को राजधानी पटना में लालू की पार्टी के नेता और मंत्री रहे डॉन बृज बिहारी प्रसाद की कमांडो सुरक्षा घेरे में गोली मारकर हत्या कर दी गई।

बृज बिहारी प्रसाद की हत्या का आरोप जेल से ही विधायक और बाद में सांसद बने लोजपा नेता सूरजभान सिंह और उनके बहुचर्चित शूटर श्रीप्रकाश शुक्ला समेत राजन तिवारी और मुन्ना शुक्ला पर लगा। इसमें से राजन तिवारी का नाम याद रख लिया जाए जो आगे चलकर बिहार में विधायक भी बने। इस दुस्साहसिक वारदात से पूरा बिहार हिल गया था कि एक मंत्री को सरकारी अस्पताल में सुरक्षा घेरे में गोलियों से भून दिया गया। लेकिन अभी राजन तिवारी के नाम कुछ और दर्ज होना बाकी था।

अगले ही दिन 14 जून, 1998 को पटना से 300 किलोमीटर दूर पूर्णिया में सदर सीट से लगातार चौथी बार विधायक बने सीपीएम नेता अजीत सरकार को गोलियों से भून दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि सरकार को 107 गोलियां मारी गई थीं। इस मर्डर में भी राजन तिवारी का नाम आया। उसी राजन तिवारी का जिसका नाम एक दिन पहले पटना में बृज बिहारी प्रसाद की हत्या में आया। साथ में नाम आया बाहुबली नेता रहे पप्पू यादव का जो सांसद भी रह चुके हैं और आजकल जाप नाम से अपनी पार्टी चलाते हैं। अजीत सरकार इलाके के लोकप्रिय कम्युनिस्ट नेता थे। हत्या के बाद पूर्णिया जल उठा। गुस्साए लोगों ने शव उठाने नहीं दिया। तोड़फोड़ और सरकारी संपत्ति का नुकसान बढ़ता जा रहा था। पूर्णिया के एसपी एएस राजन हालात संभाल नहीं पा रहे थे।

अजीत सरकार की हत्या के बाद पूर्णिया को शांत कराने हेलिकॉप्टर से आरएस भट्टी को लेकर गए थे लालू यादव

फिर पूर्णिया के जलने की तपिश पटना पहुंची तो उस समय सरकार चला रहीं राबड़ी देवी के पति और आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव हेलिकॉप्टर से पूर्णिया जाने को निकले। लालू ने आईपीएस अफसर आरएस भट्टी को साथ चलने का बुलावा भेजा। भट्टी उस समय वेटिंग फॉर पोस्टिंग में चल रहे थे और आईपीएस मेस में रहते थे। सरकार के आदेश पर आरएस भट्टी पटना में लालू के हेलिकॉप्टर पर सवार हो गए। रास्ते में लालू ने भट्टी को बताया कि आपको पूर्णिया संभालना है।

लालू का हेलिकॉप्टर पूर्णिया पहुंचा और फिर वहां से काफिला अजीत सरकार के शव तक गया। जनता ने लालू का भी विरोध शुरू कर दिया। पुलिस प्रशासन हाय-हाय से बात आगे बढ़ चुकी थी। लालू ने माहौल पढ़ लिया। फिर लालू बोलने लगे और बोलते-बोलते कह दिया- हम पंजाब से लाए हैं आरएस भट्टी को, ये अपराधियों का भट्ठा बैठा देते हैं। पूर्णिया वाले अब निश्चिंत हो जाएं। पूर्णिया के एसपी का ट्रांसफर हो चुका था। अब भट्टी वहां के नए एसपी बना दिए गए थे। लोगों का गुस्सा कुछ कम हुआ फिर लालू भट्टी को वहीं छोड़कर पटना लौट आए।

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आरएस भट्टी बिना तैयारी या सामान के पूर्णिया गए थे। उन्हें हवा में उड़ने तक नहीं पता था कि वो पूर्णिया में एसपी बनाए जा रहे हैं। भट्टी ने जांच शुरू की और उनकी जांच के बीच में अजीत सरकार हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई की जांच का जो नतीजा निकला, भट्टी की जांच से अलग नहीं था। पप्पू यादव, राजन तिवारी वगैरह आरोपी बनाए गए लेकिन कोर्ट से बरी हो गए। पूर्णिया में भट्टी ने कई क्रिमिनल गैंग को ठिकाने लगाया। धमदाहा इलाके में अपराधियों की समानांतर सरकार चलती थी, शांत हो गया।

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