पटना हाईकोर्ट में अब तेजी से होगी सुनवाई। 8 जजों की बड़ी संख्या। अभी भी इतने पद हैं खाली।

देश के सभी लोअर कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक बड़ी संख्या में केस लंबित पड़े हैं। इसका मुख्य कारण है जजों की कमी। पटना हाई कोर्ट में अब सुनवाई थोड़ी तेज हो सकती है क्योंकि जजों की संख्या 27 से बढ़कर 35 हो गई है। हालांकि अभी भी कई पद खाली हैं। केंद्र सरकार ने पटना हाइकोर्ट में न्यायिक सेवा कोटे से सात जजों को नियुक्त किया है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट से एक जज को पटना स्थानांतरित किया गया है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गयी है। एक से दो दिनों के भीतर इन सभी आठ लोगों को पटना हाइकोर्ट के जज के रूप में शपथ दिलायी जायेगी।

अभी भी 26 पद हैं खाली।

बता दें कि मुकदमों के अनुपात में जजों की कम संख्या लंबित मामलों का बड़ा कारण है। 2015 तक जजों के कुल 43 स्वीकृत पद थे, जिसे बढ़ाकर 53 किया गया। अभी 53 की जगह केवल 27 जज हैं। अबतक सबसे अधिक 37 जज हुए हैं। चार मई को सुप्रीम कोर्ट की कालेजियम ने न्यायिक सेवा कोटा के सात न्यायिक अधिकारियों का पटना हाइकोर्ट में जज के रूप में नियुक्ति की अनुशंसा की थी। इन जजों के योगदान देने के बाद ये संख्या 35 हो जायेगी।

पटना हाईकोर्ट में 2 लाख मामले हैं लंबित।

जानकारी के अनुसार पटना हाइकोर्ट में तीन लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें 1.5 लाख आपराधिक और 1.8 लाख सिविल मामले हैं। 17500 क्रिमिनल मामले की ही सुनवाई हो रही है। 600 फर्स्ट अपील और दतनी संख्या में ही सकेंड अपील के मामले लंबित हैं। जजों की कमी के कारण जमानत के मामले की भी सुनवाई समय से नहीं हो पा रही है। कई मामलों की तारीख तो वर्षों बाद मिलती है तो कई मामले बेंच के इंतजार में ही वर्षों लंबित रह जाते हैं।