प्रदेश में बाढ़ का असर। कई इलाकों में हो रही है दूध की किल्लत।

पिछले एक महीने से प्रदेश में आई बाढ़ ने लोगों का जीना दूभर कर रखा है। उत्तर बिहार के तमाम नदियां उफान पर है। गंगा दियारा क्षेत्रों में भी हालात खराब हैं हालांकि गंगा का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है लेकिन उधर भागलपुर के नवगछिया में कोसी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। कई गांव के गांव डूब चुके हैं। इस वजह से पशुओं के लिए चारा भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा असर बिहार में दुग्ध उत्पादन पर पड़ा है। पशुओं को हरा चारा उपलब्ध ना होने पाने के कारण उनका दूध कम हो गया है।

बता दें कि प्रदेश में लगभग दूध का उत्पादन 20 फ़ीसदी तक कम हो गया। जहां पहले 17 लाख लीटर दूध उत्पादन हो पाता था अभी मुश्किल से 15 लाख लीटर ही हो पा रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में हरा चारा नहीं मिल पा रहा है और सूखा चारा भी बाढ़ में भीग चुका है। इस वजह से पशुओं को भरपेट चार नहीं मिल पा रहा है। पशुपालक भाई इसकी भरपाई बाज़ार में उपलब्ध पशु आहार से कर रहे हैं जो काफी महंगा सौदा साबित हो रहा है। इधर रक्षाबंधन के त्यौहार की वजह से भी दूध की खपत काफी बढ़ गई थी।

बता दें कि राजधानी पटना में भी दूध की किल्लत हो रही है। रोज के 5 लाख लीटर के खपत की अपेछा 2-3 लाख लीटर दूध ही उपलब्ध हो पा रहा है।