बिहार से गुजरने वाले इस एक्सप्रेसवे के निर्माण प्रक्रिया में आई तेजी। एरियल सर्वे कर नक्शा बनाने का काम पूरा।

उत्तर प्रदेश में बिहार के सीमा से नजदीकी शहर गोरखपुर से लेकर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक बनने वाले एक्सप्रेस-वे के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। एरियल सर्वे कर इसका नक्शा बनाने का काम पूरा हो चुका है। एनएचएआई की देखरेख में बनने वाले इस सड़क परियोजना को भारतमाला परियोजना के अंतर्गत 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा। इससे बिहार के कई जिलों को सीधा लाभ होगा।

किशनगंज जिले में 80 किलोमीटर होगी सड़क।

यह सुपर एक्सप्रेस वे किशनगंज जिले की कोचाधामन, बहादुरगंज, ठाकुरगंज एवं पोठिया प्रखंड होकर गुजरेगी। इस जिले में इसकी लंबाई 80 किलोमीटर होगी। जमीन अधिग्रहण के लिए सीमांकन के साथ साथ ड्रोन से एयर सर्वे का कार्य पूरा किया गया है। अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी। एनएचएआई पूर्णिया के परियोजना निदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि किशनगंज जिले में 80 किलोमीटर एवं जलपाईगुड़ी में 20 किलोमीटर एक्सप्रेस वे निर्माण की जिम्मेदारी पूर्णिया डिवीजन को दी गई है।

पूरी तरह से ग्रीन फील्ड होगी सड़क।

यह सुपर एक्प्रेस वे बिल्कुल ग्रीन फील्ड होगी। यानी कि इसमें कोई भी पुरानी सड़क शामिल नहीं होगी। यह एनएच 327 ई के समानांतर गुजरेगी। यह सड़क कहीं सिक्स लेन तो कहीं आठ लेन की होगी। परियोजना निदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि सीलिगुड़ी जाने के लिए कहीं कहीं यह 327 ई को भी पार करेगी। सुपर एक्सप्रेस वे यूपी से निकलकर विहार के गोपालगंज, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज होते हुए पश्चिम बंगाल में प्रवेश करेगी।

इस सड़क की कुल लंबाई 416 किलोमीटर होगी। एनएचएआई के परियोजना निदेशक ने कहा कि परिवहन मंत्रालय भारत सरकार इस एक्सप्रेसवे का मॉनिटरिंग प्राथमिकता के आधार पर कर रही है। 4-5 घंटे में गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। परियोजना निदेशक एनएचएआई अरविंद कुमार ने कहा कि जल्द ही भू अधिग्रहण की प्रकिया शुरू होगी। सुपर एक्सप्रेस वे का डीपीआर बनकर तैयार है।